मेरा परिचय
मेरा जन्म ११ मई १९४४ को उत्तर प्रदेश , जिला गाज़ियाबाद के एक किसान परिवार में हुआ । मेरी शिक्षा मेरठ कालिज मेरठ एवं एम . एम. एच . कालिज गाज़ियाबाद में सम्पन्न हुई । किन्तु मैं बाहरी शिक्षा से नहीं बल्कि अपनी आत्म अनुभूति से जगत के यथार्थ को समझ पाया। । यही मेरा वास्तविक शिक्षण संस्थान है । जहां मेरे संरक्षक स्वयं परम पिता परमात्मा रहे हैं । मेरठ कालिज में मुझे वर्ष के सर्वश्रेष्ठ कवि का सम्मान मेरी कविता ‘मैं विरह की आत्मा हूँ’ को प्रदान किया गया । जो मेरे छात्र जीवन की एक अविस्मरणीय स्मृति है ।
मैं आध्यात्मिक चिंतन में पला एक ऐसा व्यक्ति हूँ । जिसे आध्यात्मिक गंभीरता बचपन से ही परमात्मा की विशिष्ट कृपा स्वरूप प्राप्त हुई । जिसने मुझे नितांत एकांत प्रिय एवं गहन चिंतक बना दिया । मानव कल्याण का भाव तो सदा से ही मेरे अंतर मन में समया हुआ है ।
मैं जीवन के प्रारम्भ से ही अत्यंत भावुक एवं अति संवेदनशील व्यक्ति हूँ । मैंने जीवन के प्रत्येक पल को इसी परिवेश में जिया है । मैं कवि कब और कैसे बन गया , मुझे पता ही नहीं चला । बस , मैं तो अनजाने ही अपनी कविता के साथ जीने लगा ।आज मैं अपने कवित का उपयोग केवल अपने प्रवाचनों में ही करता हूँ । यह मेरे लिए केवल अपने इष्ट के प्रति एक समर्पित भावना है । और यही इसका सर्वोत्तम उपयोग है ।
मैंने अनेक आध्यात्मिक एवं धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन तो अवश्य किया है । किन्तु कभी किसी से जुड़ा नहीं । मेरे लिए तो मेरा मानवतावादी आध्यात्मिक दर्शन ही सर्वोपरि रहा है । उपनिषद् मुझे अवश्य प्रिय लगे ।
मानव कल्याण के लक्ष्य सहित, मैं परमसत्य परमात्मा से जुड़कर सदैव उसी के चिंतन से बंधा रहा हूँ । और उसी परम्परा को निरन्तरता प्रदान करने हेतु मैं इसके प्रचार प्रसार को समर्पित हूँ ।
जीवन का एक-एक पल असाधारण है , नित्य नूतन है । मैं सदैव उसी पल के प्रति प्रतीक्षारत रहा हूँ । मैंने आने वाले प्रत्येक पल में कुछ अद्भुत खोजने का प्रयास किया है । जीवन के इसी उपक्रम के अनुरूप चलते चलते मैं आज यहाँ तक पहुँच पाया हूँ । परमात्मा से प्राप्त इस जीवन का एक-एक पल उसी के मार्ग पर कैसे किसी उच्चतम उद्देश्य हेतु अर्पित हो सके , इसी चेष्टा के साथ जीता हूँ । परमात्मा के प्रतिरूप ‘मानव’ के प्रति अति संवेदनशीलता का यही आधार है कि मैं मानव के अंतर में बैठे उसी परमात्मा को अनुभूत करता हूँ । इसी लिए मानव सेवा ही मेरा परम लक्ष्य बना हुआ है ।
